Mahatma Gandhi 462kg statue stolen in Australia: 426 किलो की भारी-भरकम मूर्ति को कटर से काटकर ले गए चोर

Channelindiaone
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मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ रोविल (Rowville) स्थित ‘ऑस्ट्रेलियाई भारतीय सामुदायिक केंद्र’ (AICC) परिसर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 426 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा चोरी हो गई है। चोरों ने इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए ‘एंगल ग्राइंडर’ (लोहा काटने वाली मशीन) का इस्तेमाल किया और मूर्ति को उसके बेस से काटकर ले उड़े।

भारत सरकार ने जताई कड़ी नाराजगी

इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, “हम मेलबर्न के रोविल में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने और उसे चोरी करने की घटना की कड़ी निंदा करते हैं। हमने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है और उनसे अपराधियों को जल्द पकड़ने और प्रतिमा बरामद करने का आग्रह किया है।”

सीसीटीवी में दिखे तीन संदिग्ध

विक्टोरिया पुलिस के Knox क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट के अनुसार, यह घटना 12 जनवरी की रात लगभग 12:50 बजे हुई। सीसीटीवी फुटेज और शुरुआती जांच में तीन अज्ञात लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने स्थानीय स्क्रैप मेटल डीलरों (कबाड़ व्यापारियों) को भी अलर्ट जारी किया है कि यदि कोई इस भारी-भरकम कांस्य प्रतिमा को बेचने की कोशिश करे, तो तुरंत इसकी सूचना दें।

भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती का प्रतीक थी यह प्रतिमा

यह प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक थी।

  • उपहार: इसे भारत सरकार (ICCR) द्वारा 2021 में दान किया गया था।

  • उद्घाटन: इसका उद्घाटन ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने किया था।

  • अहमियत: पूरे विक्टोरिया प्रांत में गांधी जी की यह इकलौती प्रतिमा थी।

क्या यह नस्लवाद का मामला है?

‘ऑस्ट्रेलियाई इंडियन कम्युनिटी चैरिटेबल ट्रस्ट’ के अध्यक्ष वासन श्रीनिवासन ने इसे लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि गांधी जी “पीपल पावर” के प्रतीक थे और इस नुकसान से भारतीय समुदाय दुखी है। हालांकि, उन्होंने इसे नस्लीय हमला मानने से इनकार किया है, क्योंकि घटनास्थल पर कोई आपत्तिजनक स्लोगन या ग्राफिटी (दीवार पर लिखी बातें) नहीं मिली है।

गौरतलब है कि 2021 में उद्घाटन के महज 24 घंटे बाद भी इस प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की कोशिश की गई थी। उस समय इसे खालिस्तानी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन इस बार पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

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