The East India Company goes bankrupt again: फिर ‘दिवालिया’ हुई ईस्ट इंडिया कंपनी, लंदन में आखिरी स्टोर पर भी लटका ताला

Channelindiaone
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लंदन/नई दिल्ली: जिस नाम ने कभी भारत समेत दुनिया के बड़े हिस्से पर राज किया, जिसकी अपनी सेना थी और जिसका सिक्का चलता था, वह ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ अब इतिहास के पन्नों में फिर से दफन होने जा रही है। कभी दुनिया की सबसे ताकतवर व्यापारिक संस्था रही इस कंपनी का आधुनिक अवतार (Luxury Retailer) अब पूरी तरह बंद हो गया है।

विरासत से लग्जरी तक का सफर रहा छोटा

साल 2010 में भारतीय मूल के उद्यमी संजीव मेहता ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एक ‘लग्जरी फूड और ड्रिंक’ ब्रांड के तौर पर फिर से जिंदा किया था। इसका मकसद साम्राज्य के कड़वे इतिहास को पीछे छोड़कर उसकी विरासत (Heritage) के जरिए चाय, कॉफी और चॉकलेट जैसे प्रीमियम उत्पाद बेचना था। लंदन के पॉश इलाके ‘न्यू बॉन्ड स्ट्रीट’ पर इसका भव्य स्टोर पर्यटकों और ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था।

लेकिन, ‘द संडे टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दूसरी पारी बहुत छोटी रही। कंपनी अब लिक्विडेशन (Liquidation) यानी दिवालिया होने की प्रक्रिया में चली गई है।

खाली पड़ी दुकानें और बंद हुई वेबसाइट

ईस्ट इंडिया कंपनी का पतन कितना खामोश है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  • लंदन के न्यू बॉन्ड स्ट्रीट स्थित स्टोर अब खाली हो चुका है और उसे किराए पर देने के लिए विज्ञापन लगा दिए गए हैं।

  • कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट अब काम नहीं कर रही है।

  • कंपनी की एक अन्य इकाई ‘ईस्ट इंडिया कंपनी कलेक्शंस लिमिटेड’ को कानूनी नोटिस (Winding-up Petition) जारी किया गया है, जो आमतौर पर कर्ज न चुका पाने की स्थिति में होता है।

  • फिलहाल केवल ‘सेल्फ्रिज’ की वेबसाइट पर कंपनी का एक आखिरी टी-गिफ्ट बॉक्स बिक्री के लिए बचा है।

1857 से 2026: एक विवादित इतिहास

दुनिया की पहली मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन कही जाने वाली इस कंपनी का इतिहास व्यापार, विजय और विवादों से भरा रहा है।

  1. निजी सेना और राज: 19वीं सदी की शुरुआत में इस कंपनी के पास करीब 2.5 लाख सैनिकों की अपनी सेना थी।

  2. 1857 का विद्रोह: भारत में 1857 की क्रांति के बाद, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों के चलते ब्रिटिश क्राउन ने कंपनी को भंग कर दिया था और शासन सीधे अपने हाथ में ले लिया था।

  3. गहरा दाग: इतिहासकार इस कंपनी को गुलामी, शोषण और अकाल जैसी त्रासदियों के लिए जिम्मेदार मानते हैं।

अब क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कंपनी का अंत बहुत ही शांत तरीके से हुआ है, जो 1857 के उस शोर-शराबे वाले पतन से बिल्कुल अलग है। जिस तरह से कंपनी के वित्तीय हालात बिगड़े हैं, उसे देखते हुए अब तीसरी बार इसके पुनरुद्धार (Revival) की संभावना न के बराबर है।


मुख्य बातें (Quick Facts):

  • ताजा अपडेट: ईस्ट इंडिया कंपनी का आधुनिक लग्जरी ब्रांड दिवालिया हुआ।

  • लंदन स्टोर: 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट वाला स्टोर अब पूरी तरह खाली।

  • इतिहास: 1857 की क्रांति के बाद पहली बार ब्रिटिश सरकार ने इसे भंग किया था।

  • कारण: भारी कर्ज और वित्तीय संकट के चलते लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू।

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