US-Iran War Updates: इस्लामाबाद बना ‘दुनिया का अखाड़ा’; ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी परोक्ष जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान करेगा मध्यस्थता

Channelindiaone
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इस्लामाबाद | 25 अप्रैल, 2026 | US-Iran War Updates: दुनिया की नजरें इस समय पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जो एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूतों का एक साथ यहाँ पहुँचना इस बात का संकेत है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है। हालांकि, ईरान ने अपनी पुरानी जिद पर कायम रहते हुए अमेरिका से हाथ मिलाने या आमने-सामने बैठने से साफ इनकार कर दिया है।

ईरान की ‘नो डायरेक्ट टॉक’ पॉलिसी: आखिर क्यों?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे वाशिंगटन के प्रतिनिधियों के साथ एक ही कमरे में नहीं बैठेंगे। ईरान का यह सख्त रवैया 28 फरवरी की उस घटना के बाद और कड़ा हुआ है, जब कूटनीतिक बातचीत के तुरंत बाद अमेरिका और इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमले किए थे।

ईरान अब “शटल डिप्लोमेसी” का सहारा ले रहा है। यानी ईरानी पक्ष अपनी बात पाकिस्तान को बताएगा और पाकिस्तान के अधिकारी उस संदेश को अमेरिकी दूतों तक पहुँचाएंगे। यह कूटनीति का वह तरीका है जिसका उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब दो देशों के बीच विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका हो।

जारेड कुशनर की वापसी: ट्रंप युग की रणनीति का संकेत?

व्हाइट हाउस ने इस बार अपने सबसे अनुभवी दूतों—जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को मैदान में उतारा है। कुशनर, जिन्हें ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) का वास्तुकार माना जाता है, की मौजूदगी यह दर्शाती है कि अमेरिका इस बार केवल युद्ध विराम नहीं, बल्कि किसी स्थायी क्षेत्रीय समाधान की तलाश में है। राष्ट्रपति जे.डी. वेंस फिलहाल पर्दे के पीछे से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।

दांव पर क्या लगा है?

यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे प्रभावित है:

  1. होर्मुज की नाकेबंदी: ईरान ने दुनिया की 20% तेल सप्लाई वाले रास्ते (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर रखा है। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो वैश्विक तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

  2. परमाणु भय: इजरायल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के ‘ब्रेकआउट टाइम’ (Breakout Time) के बेहद करीब है।

  3. क्षेत्रीय स्थिरता: खाड़ी देशों और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमलों ने पूरे मिड-ईस्ट को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है।

क्या पाकिस्तान सफल हो पाएगा?

पाकिस्तान के लिए यह ‘दोधारी तलवार’ पर चलने जैसा है। एक तरफ उसका पड़ोसी देश ईरान है और दूसरी तरफ उसका सबसे बड़ा आर्थिक मददगार अमेरिका। यदि पाकिस्तान इस गतिरोध को सुलझाने में सफल रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी कूटनीतिक साख कई गुना बढ़ जाएगी।


Inside Story: वार्ता के 3 प्रमुख बिंदु

  • युद्ध विराम: क्या अमेरिका इजरायल को हमले रोकने के लिए मना पाएगा?

  • समुद्री मार्ग: क्या ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से प्रतिबंध हटाने को तैयार होगा?

  • परमाणु गारंटी: क्या ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) को सीमित करने का लिखित आश्वासन देगा?


निष्कर्ष: दुनिया एक और महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है और उसकी चाबी फिलहाल इस्लामाबाद के हाथों में है। अगर पाकिस्तान के जरिए ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों का यह आदान-प्रदान किसी समझौते में बदलता है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।

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