वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में हुई भारी बढ़ोतरी ने पूरी दुनिया को एक संभावित बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास इस सप्ताहांत तक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का विकल्प मौजूद है।
यह स्थिति ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है—क्या वे कूटनीति का रास्ता चुनेंगे या एक विनाशकारी युद्ध का?
ईरान की घेराबंदी: 2003 के बाद सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा
पेंटागन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों, बैलिस्टिक मिसाइलों और लॉन्च साइटों को निशाना बनाने में सक्षम सैन्य बल को तैनात करना जारी रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2003 के इराक युद्ध के बाद मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि यह तैयारी तब भी जारी है, जब मंगलवार को दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत हुई। ईरान ने एक राजनयिक समाधान का प्रस्ताव तैयार करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
ट्रंप की कथनी और करनी में विरोधाभास
राष्ट्रपति ट्रंप एक तरफ तो कहते हैं कि वे एक ऐसा समझौता चाहते हैं जो ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को समाप्त करे, वहीं दूसरी ओर उनकी भाषा बेहद आक्रामक हो चुकी है।
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डिप्लोमेसी की उम्मीद: व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के लिए समझौता करना ही “बुद्धिमानी” होगी।
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सैन्य बल का उपयोग: ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य बल का उपयोग करने में कोई संकोच नहीं दिखाया है। वेनेजुएला पर जनवरी में हुआ हमला इस बात का प्रमाण है कि उनकी धमकियों को केवल ‘नेगोशिएशन टैक्टिक’ (मोलभाव की रणनीति) मानकर खारिज नहीं किया जा सकता।
घरेलू राजनीति और ‘नोबेल’ की चाहत
ईरान के साथ युद्ध ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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MAGA बेस की नाराजगी: ट्रंप ने 2024 के चुनाव में वादा किया था कि वे अमेरिका को विदेशी संघर्षों से बाहर निकालेंगे। यूक्रेन जैसे युद्धों में हस्तक्षेप का विरोध करने वाले उनके समर्थक एक नए युद्ध को पसंद नहीं करेंगे।
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मध्यवधि चुनाव (Midterm Elections): अमेरिका में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। पोल बताते हैं कि जनता महंगाई और अर्थव्यवस्था से परेशान है। ऐसे में एक लंबा हवाई अभियान मतदाताओं को नाराज कर सकता है।
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नोबेल शांति पुरस्कार: ट्रंप अक्सर दावा करते हैं कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में कई युद्ध समाप्त किए हैं और वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। ईरान पर हमला उनकी इस छवि के विपरीत जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता सस्पेंस
पिछले हफ्ते इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। ट्रंप का कहना है कि दुनिया को थोड़ा इंतज़ार करना होगा। उन्होंने गुरुवार को स्पष्ट किया, “हमें एक सार्थक समझौता करना होगा, अन्यथा बुरी चीजें हो सकती हैं।”
चाहे वेनेजुएला का हमला हो या ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की उनकी इच्छा, ट्रंप की कार्यशैली ने सहयोगियों और विरोधियों दोनों को असमंजस में डाल रखा है। वे खुद को एक ‘डीलमेकर’ के रूप में पेश करना पसंद करते हैं, लेकिन उनकी ‘अनप्रिडिक्टेबल’ (अनिश्चित) नीतियां दुनिया को डरा रही हैं।
निष्कर्ष
अगले हफ्ते ट्रंप अपना ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन देंगे। इस दौरान उन्हें न केवल ईरान के प्रति अपनी रणनीति स्पष्ट करनी होगी, बल्कि यह भी बताना होगा कि उनकी विदेश नीति उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे में कैसे फिट बैठती है।

