नीरू धांडा ने रचा इतिहास: एशियन गेम्स 2026 में ट्रैप शूटिंग में भारत को दिलाया स्वर्ण

Channelindiaone
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आइची-नागोया (जापान), 29 सितंबर: भारतीय निशानेबाज़ नीरू धांडा ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा का गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके साथ भारत की पदक तालिका में एक और स्वर्ण जुड़ गया। उन्होंने क्वालिफिकेशन और फाइनल दोनों में शीर्ष स्थान हासिल किया और आइची-नागोया खेलों में भारत का पाँचवाँ स्वर्ण पदक पक्का किया।

मंगलवार का दिन नीरू के लिए दोहरी सफलता का रहा। व्यक्तिगत स्पर्धा से पहले वे टीम इवेंट में उतरीं। नीरू, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर की तिकड़ी ने कुल 328 अंकों के साथ महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। उसी टीम स्पर्धा में चीन ने 346 अंकों के साथ स्वर्ण और कुवैत ने 325 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता।

टीम स्पर्धा में नीरू का प्रदर्शन भारतीय दल में सबसे अच्छा रहा। उन्होंने 125 में से 118 लक्ष्य भेदे, जो टीम में भारत का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। इसके कुछ घंटे बाद वे व्यक्तिगत फाइनल में उतरीं और स्वर्ण अपने नाम किया।

बारिश के बीच दिखाया संयम

आइची-नागोया में इन दिनों मौसम खिलाड़ियों की परीक्षा ले रहा है। लगातार बारिश से खेलों में बाधा पड़ी है और क्रिकेट के क्वार्टर फाइनल तक बिना एक गेंद फेंके रद्द करने पड़े। ट्रैप जैसी खुले मैदान की स्पर्धा में हवा और बारिश निशाने को कठिन बना देते हैं। इसके बावजूद नीरू ने क्वालिफिकेशन और फाइनल दोनों में बढ़त बनाए रखी और चीन की सुन युनोंग तथा कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक को पीछे छोड़ा।

फाइनल की शुरुआत उन्होंने शानदार की। पहली सीरीज़ में उन्होंने सभी पाँच लक्ष्य भेदे और चार सीरीज़ के बाद 20 में से 19 निशाने सही लगाए। ट्रैप फाइनल में हर चूक भारी पड़ती है, इसलिए उनका यह संयम निर्णायक रहा।

स्कोर पर अलग-अलग रिपोर्ट

फाइनल के स्कोर को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें ईएसपीएन का हवाला दिया गया है, आठ निशानेबाज़ों के फाइनल में नीरू का स्कोर 26 रहा। वहीं ओलंपिक्स डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक उनका स्कोर 28 रहा, जिसे उसने एशियाई रिकॉर्ड बताया है, और कुवैत की अब्दुलमलिक को 21 अंकों के साथ कांस्य मिला। आधिकारिक अंतिम स्कोरशीट आने पर इसकी पुष्टि की जानी चाहिए। प्रकाशन से पहले इस आँकड़े को जाँच लेना बेहतर होगा।

भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

ओलंपिक्स डॉट कॉम के अनुसार यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। नीरू भारत की पहली महिला हैं जिन्होंने एशियन गेम्स में किसी भी शॉटगन स्पर्धा में स्वर्ण जीता है। साथ ही वे एशियन गेम्स की महिला ट्रैप स्पर्धा में भारत की पहली व्यक्तिगत पदक विजेता भी बनी हैं। यह स्पर्धा पहली बार 1990 के बीजिंग खेलों में हुई थी।

भारत को इस स्पर्धा में पहले टीम पदक ही मिले थे। 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में मनीषा कीर, राजेश्वरी कुमारी और प्रीति रजक की टीम ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत जीता था। अब नीरू ने व्यक्तिगत स्तर पर स्वर्ण जीतकर उस सिलसिले को आगे बढ़ाया है।

पदक तालिका में भारत की स्थिति

नीरू की जीत के बाद भारत की स्थिति मज़बूत हुई है। उनके व्यक्तिगत स्वर्ण से भारत के कुल पदक 47 हो गए, जिनमें पाँच स्वर्ण, 21 रजत और 21 कांस्य शामिल हैं। निशानेबाज़ी में भारत की झोली भरी हुई है। नीरू के स्वर्ण और टीम रजत के बाद खेलों में भारत का निशानेबाज़ी पदक आँकड़ा 14 हो गया, जिसमें दो स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य हैं। निशानेबाज़ी का दूसरा स्वर्ण सुरुचि सिंह और कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में जीता था। मीफाइनल में चीन के ली शू को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बनाई।

फॉर्म में चल रही हैं नीरू

यह जीत अचानक नहीं आई है। इस साल नीरू लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। वे आइची-नागोया में मौजूदा एशियाई चैंपियन के रूप में पहुँची थीं, क्योंकि उन्होंने 2025 में शिम्केंत में महाद्वीपीय खिताब जीता था। जुलाई में इटली के लोनाटो में उन्होंने अपना पहला आईएसएसएफ वर्ल्ड कप स्वर्ण महिला ट्रैप स्पर्धा में जीता। इस तरह एक ही साल में वर्ल्ड कप स्वर्ण और एशियन गेम्स स्वर्ण उनके नाम हो गए।

सेना से जुड़ा सफ़र और परिवार की प्रेरणा

नीरू भारतीय सेना से जुड़ी हैं। वे इंडियन आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट की निशानेबाज़ हैं और नायब सूबेदार के पद पर हैं। देश के लिए मेडल जीतने के साथ सेना की वर्दी का सम्मान बढ़ाना उनके लिए दोहरी उपलब्धि है।

उनकी प्रेरणा परिवार से ही आई। उन्होंने अपने चचेरे भाई लक्षय शेओराण से प्रेरित होकर निशानेबाज़ी शुरू की, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा में रजत जीता था। अब नीरू ने स्वर्ण जीतकर एशियन गेम्स के मंच पर उनसे एक कदम आगे की उपलब्धि दर्ज की है।

क्या है ट्रैप शूटिंग?

ट्रैप शॉटगन निशानेबाज़ी की एक स्पर्धा है। इसमें निशानेबाज़ के सामने मिट्टी की प्लेटें, जिन्हें क्ले टारगेट कहा जाता है, अलग-अलग दिशाओं और कोणों में तेज़ी से उड़ाई जाती हैं। निशानेबाज़ को कुछ ही पल में सही अंदाज़ा लगाकर प्लेट को गोली से तोड़ना होता है। हवा, बारिश और रोशनी जैसे कारक इसे और कठिन बनाते हैं। इसीलिए इसमें तकनीक के साथ मानसिक मज़बूती बहुत मायने रखती है। सेना में सेवा के दौरान मिला अनुशासन और दबाव में शांत रहने का अभ्यास नीरू के प्रदर्शन में साफ़ दिखा।

आगे की राह

नीरू की जीत से भारतीय महिला निशानेबाज़ी को नई ऊर्जा मिली है। ट्रैप और स्कीट जैसी शॉटगन स्पर्धाओं में भारत लंबे समय से पदक की उम्मीद रखता आया है। इस स्वर्ण से नई पीढ़ी की महिला निशानेबाज़ों को प्रेरणा मिलेगी। आगे खेलों में पुरुष ट्रैप फाइनल और अन्य स्पर्धाओं पर भी देश की नज़र रहेगी। एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।

नीरू धांडा ने आज साबित किया कि लगातार मेहनत, अनुशासन और धैर्य से मुश्किल हालात में भी शिखर तक पहुँचा जा सकता है। पूरे देश को उन पर गर्व है।

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