श्योपुर (मप्र): भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ को एक नई ऊंचाई देते हुए शनिवार (28 फरवरी 2026) की सुबह अफ्रीका से 8 और चीते मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) पहुंच रहे हैं। यह तीसरा मौका है जब अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण (Intercontinental Translocation) के जरिए इन बिग कैट्स को भारत लाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री करेंगे स्वागत
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन चीतों को विशेष विमान से लाया जा रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहकर इन नए मेहमानों को उनके लिए तैयार किए गए विशेष बाड़ों (Enclosures) में छोड़ेंगे।
कूनो में चीतों का बढ़ता संसार: आंकड़े देते हैं गवाही
प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा के मुताबिक, कूनो अब धीरे-धीरे चीतों के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक ठिकाना बनता जा रहा है। कूनो की सफलता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
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कुल संख्या: नए 8 चीतों के आने के बाद कूनो में चीतों का कुल कुनबा अब 48 तक पहुंच गया है। कूनो अब अपनी ‘हाफ सेंचुरी’ (50) पूरी करने के बेहद करीब है।
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शावकों की किलकारी: पार्क में अब तक कुल 39 शावकों ने जन्म लिया है, जिनमें से 27 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
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नई पीढ़ी: हाल ही में भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ के 5 शावकों ने कूनो के पर्यावरण में खुद को बखूबी ढाल लिया है।
सुरक्षा और सेहत पर विशेष ध्यान
विशेषज्ञों ने बताया कि नए आए इन चीतों को अगले कुछ दिनों तक कड़े वैज्ञानिक पर्यवेक्षण और क्वारंटाइन (Quarantine) में रखा जाएगा।
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रणनीति: किसी भी संभावित बीमारी या संक्रमण के खतरे को टालने के लिए अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों को एक साथ नहीं रखने की विशेष रणनीति अपनाई जा रही है।
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शिफ्टिंग: वर्तमान में 36 चीते कूनो में सक्रिय हैं, जबकि 3 चीतों को हाल ही में गांधी सागर अभयारण्य में शिफ्ट किया गया है।
निष्कर्ष
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब अफ्रीका के इस तीसरे जत्थे के आने से भारत में चीतों के पुनरुद्धार (Revival) के सपने को नई ताकत मिली है। कूनो नेशनल पार्क अब दुनिया भर के वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए शोध और पर्यटन का केंद्र बनता जा रहा है।

