घटनाक्रम का सारांश:
| विवरण | जानकारी |
| हादसे का स्थान | नाजीराबाद, नारेंद्रपुर (ईएम बाईपास के पास) |
| प्रभावित इकाइयाँ | मोमो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और डेकोरेटर गोदाम |
| मुख्य आरोपी | गंगाधर दास (गिरफ्तार), फूड चेन मालिक (फरार/आरोपी) |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | सुवेंदु अधिकारी द्वारा विरोध रैली और न्याय की मांग |
| लापता मजदूरों का क्षेत्र | पूर्वी मिदनापुर (नंदीग्राम, पिंगला, तामलुक आदि) |
कोलकाता/नारेंद्रपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नारेंद्रपुर के नाजीराबाद में हुए भीषण अग्निकांड के पांच दिन बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस त्रासदी में जान गंवाने वाले मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को एक विशाल विरोध रैली का नेतृत्व किया।
न्यूज़ हाइलाइट्स:
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मुख्य मांग: शहर की मशहूर फूड चेन ‘Wow! Momo’ के मालिकों की तत्काल गिरफ्तारी।
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बड़ा आरोप: सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है।
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हादसे की तारीख: 26 जनवरी, 2026 की सुबह दो गोदामों में लगी थी आग।
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हताहतों की स्थिति: अब तक करीब 25 शरीर के अवशेष मिले हैं; 25 से अधिक मजदूर लापता हैं।
क्या है पूरा मामला?
हादसे की शुरुआत गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की सुबह हुई, जब नारेंद्रपुर थाना क्षेत्र के नाजीराबाद में एक मोमो बनाने वाली यूनिट और एक डेकोरेटर के गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसने पल भर में सब कुछ राख कर दिया। शुरुआती जांच में आग लगने का केंद्र गंगाधर दास का गोदाम बताया जा रहा है, जो ‘Wow! Momo’ की यूनिट के ठीक बगल में स्थित था। पुलिस ने गंगाधर दास को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असली दोषियों पर कार्रवाई अभी बाकी है।
“मजदूरों को अंदर बंद किया गया था” – गंभीर आरोप
विरोध रैली के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पांच दिन बीत चुके हैं, रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक घटनास्थल का दौरा नहीं किया है।”
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जिस वक्त आग लगी, गोदाम के दरवाजे बाहर से बंद थे, जिसके कारण अंदर फंसे मजदूर बाहर नहीं निकल पाए। लापता मजदूरों में से अधिकांश पूर्वी मिदनापुर के पिंगला, मोयना और नंदीकुमार जैसे इलाकों के रहने वाले थे।
शिनाख्त के लिए होगा DNA टेस्ट
पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की संख्या और उनकी पहचान स्पष्ट करना है।
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अब तक घटनास्थल से 25 शरीर के अंग बरामद हुए हैं, जिन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
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शवों की पहचान के लिए लापता लोगों के परिजनों के साथ DNA टेस्ट कराया जाएगा।
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कोलकाता नगर निगम ने जली हुई लोहे की संरचनाओं को गिराने का काम शुरू कर दिया है।
निष्कर्ष: नाजीराबाद का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। अब सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हैं।

