मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
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राजपाल यादव ने गुरुवार शाम 4 बजे तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सरेंडर की डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार।
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करोड़ों रुपये के चेक बाउंस मामले में मई 2024 में मिली थी सजा।
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कोर्ट ने बार-बार भुगतान न करने पर जताई नाराजगी।
नई दिल्ली: अपनी शानदार कॉमेडी से करोड़ों दिलों को जीतने वाले अभिनेता राजपाल नौरंग यादव को कानूनी पचड़े में फंसने के बाद गुरुवार शाम तिहाड़ जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी सरेंडर की समयसीमा बढ़ाने से इनकार करने के बाद अभिनेता के पास कोई और विकल्प नहीं बचा था।
क्या था पूरा मामला?
राजपाल यादव का विवाद ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी के साथ काफी समय से चल रहा है। उन पर करोड़ों रुपये के चेक अनादरण (Cheque Dishonour) के कई मामले दर्ज थे।
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मई 2024: निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
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जून 2024: दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक (Suspend) लगा दी थी, ताकि वह शिकायतकर्ता कंपनी के साथ समझौता (Settlement) कर सकें और बकाया रकम चुका सकें।
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ब्रीच ऑफ अंडरटेकिंग: अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद राजपाल यादव ने पेमेंट के वादों को पूरा नहीं किया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव की अर्जी को खारिज करते हुए बेहद सख्त लहजा अपनाया। कोर्ट ने कहा कि अभिनेता को पहले दी गई ‘नरमी’ (Leniency) अब वापस ली जा रही है क्योंकि उन्होंने अदालत में दिए गए हलफनामों और वादों का बार-बार उल्लंघन किया है।
“अदालत से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह बार-बार उल्लंघन करने वालों के प्रति उदारता दिखाती रहे। कई बार अवसर देने के बावजूद करोड़ों रुपये की देनदारी नहीं चुकाई गई।” – दिल्ली हाईकोर्ट
राजपाल के वकीलों ने डिमांड ड्राफ्ट में तकनीकी गलतियों का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे ‘भरोसे के लायक नहीं’ माना।
तिहाड़ में हुई एंट्री
गुरुवार शाम करीब 4 बजे राजपाल यादव तिहाड़ जेल पहुंचे। जेल सूत्रों के मुताबिक, उनके आत्मसमर्पण के बाद अब मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि सरेंडर करने के बाद यादव कानून के मुताबिक अपनी रिहाई या राहत के लिए उचित आवेदन दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
शिकायतकर्ता को मिलेगी राहत
अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि राजपाल यादव द्वारा रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले से जमा की गई राशि को शिकायतकर्ता कंपनी को जारी कर दिया जाए।

