Breaking Rajasthan News | Cyber Fraud Racket Busted In Rajasthan: राजस्थान पुलिस की बड़ी कामयाबी; व्हाट्सएप पर ‘चेयरमैन’ बनकर की ₹5.30 करोड़ की ठगी, 17 जालसाज गिरफ्तार

Channelindiaone
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जयपुर/कोटा | 4 मई, 2026 | Breaking Rajasthan News | Cyber Fraud Racket Busted In Rajasthan: राजस्थान पुलिस की स्पेशल साइबर क्राइम सेल ने अंतरराज्यीय ठगों के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने एक नामी माइनिंग कंपनी के अकाउंटेंट को व्हाट्सएप (WhatsApp) पर झांसा देकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से 17 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

इस गिरोह ने ‘गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (Galaxy Mining Pvt Ltd) के अकाउंटेंट को व्हाट्सएप पर कंपनी के चेयरमैन बनकर मैसेज किया और इमरजेंसी फंड ट्रांसफर के नाम पर ₹5.30 करोड़ की चपत लगा दी।

कैसे हुई करोड़ों की यह ठगी? (Modus Operandi)

साइबर क्राइम शाखा के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) शांतनु कुमार सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना की शुरुआत 24 अप्रैल को हुई। माइनिंग कंपनी के अकाउंटेंट के पास एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले ने खुद को कंपनी का ‘चेयरमैन’ बताया और अपनी पहचान की प्रामाणिकता साबित करने के लिए व्हाट्सएप पर चेयरमैन की तस्वीर (DP) भी लगा रखी थी।

जालसाज ने अकाउंटेंट को विश्वास में लिया और एक कथित जरूरी व्यावसायिक सौदे के लिए तुरंत फंड की आवश्यकता बताई। ‘चेयरमैन’ के कथित निर्देशों का पालन करते हुए, अकाउंटेंट ने बिना जांच-पड़ताल किए बताए गए दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹5.30 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।

खुलासा और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

रकम ट्रांसफर होने के कुछ समय बाद, जब अकाउंटेंट ने असली चेयरमैन से संपर्क किया, तब उसे ठगी का अहसास हुआ। बिना समय बर्बाद किए, 24 अप्रैल को ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर स्थित साइबर सेल ने विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों का विश्लेषण किया जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था। जांच में सामने आया कि ठगों ने पैसे को तुरंत एक खाते से दूसरे खाते में घुमाया, ताकि पुलिस को पैसे की ट्रेल (Money Trail) ट्रेस करने में मुश्किल हो।

क्रिप्टोकरेंसी और हवाला का कनेक्शन

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ठगों ने लूटी गई रकम के एक बड़े हिस्से को लॉन्डर (Launder) करने के लिए आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने पाया कि पैसे को डिजिटल करेंसी, विशेष रूप से USDT (एक प्रकार की स्टेबल क्रिप्टो टोकन) में बदला गया और कुछ हिस्सा हवाला (Hawala) चैनलों के जरिए विदेशों में भेजा गया।

इस गिरोह के सदस्य फर्जी या कमीशन पर लिए गए बैंक खातों का इंतजाम करते थे, जिनमें ठगी की रकम आती थी। इसके बाद उस पैसे को या तो नकद निकाल लिया जाता था या फिर क्रिप्टो एक्सचेंज के जरिए डिजिटल एसेट में बदल दिया जाता था।

चाय की थड़ी पर बनता था प्लान; ऐसे धरे गए आरोपी

राजस्थान पुलिस ने कोटा रूरल, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर सिटी और बाड़मेर पुलिस इकाइयों के सहयोग से एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की। इस संयुक्त ऑपरेशन में पुलिस ने उन 17 आरोपियों को दबोच लिया, जिनमें बैंक खाताधारक और बिचौलिए (Intermediaries) शामिल थे।

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अक्सर चाय की थड़ियों (Tea Stalls) या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मिलते थे। वहां वे नए बैंक खातों की डिटेल शेयर करते थे, पैसे निकालने की योजना बनाते थे और अपना कमीशन बांटते थे, ताकि किसी को शक न हो।

कमीशन के लालच में फंस रहे हैं गरीब लोग

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी नाई की दुकान, छोटी दुकानों में काम करने वाले या दिहाड़ी मजदूर हैं। इन लोगों को गिरोह के सरगनाओं ने ₹3,000 से ₹50,000 तक के कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए या उनके मौजूदा खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया।

कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी खाते खुलवाकर गिरोह को उनके एटीएम और ऑनलाइन एक्सेस सौंप दिए थे। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं और अन्य कड़ियों की तलाश में जुटी है।


ठगी का लेखा-जोखा: मुख्य आंकड़े

विवरण जानकारी
कुल ठगी की रकम ₹5.30 करोड़
गिरफ्तार आरोपी 17
ठगी का तरीका व्हाट्सएप पर चेयरमैन बनकर (Impersonation)
मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका क्रिप्टोकरेंसी (USDT) और हवाला
पीड़ित अकाउंटेंट, गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड
हेल्पलाइन 1930

जनता के लिए सलाह: यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब केवल आम जनता को ही नहीं, बल्कि बड़े कॉरपोरेट्स को भी आधुनिक तरीकों से निशाना बना रहे हैं। राजस्थान पुलिस की यह सफलता सराहनीय है।

जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी व्हाट्सएप या सोशल मीडिया संदेश पर भरोसा करके वित्तीय लेनदेन न करें, खासकर जब वह किसी बड़े अधिकारी या परिचित के नाम से भेजा गया हो। पैसे ट्रांसफर करने से पहले हमेशा संबंधित व्यक्ति से दूसरे माध्यम (जैसे सीधे कॉल) पर बात करके पुष्टि जरूर करें। यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।

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