नई दिल्ली: भारत के प्रशासनिक इतिहास में आज 13 फरवरी का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के नवनिर्मित परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया, जो अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नया ठिकाना होगा। खास बात यह है कि नए दफ्तर की दीवारों पर ‘नागरिको देवो भव’ (नागरिक देवता के समान हैं) का आदर्श वाक्य अंकित है, जो सरकार के सेवा संकल्प को दर्शाता है।
13 फरवरी का ऐतिहासिक कनेक्शन
इस तारीख का चुनाव बेहद सोच-समझकर किया गया है। दरअसल, आज से ठीक 95 साल पहले 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली का औपचारिक रूप से भारत की राजधानी के रूप में उद्घाटन हुआ था। इस ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी ने न केवल ‘सेवा तीर्थ’ बल्कि ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ का भी लोकार्पण किया, जहाँ अब कई महत्वपूर्ण मंत्रालय एक ही छत के नीचे काम कर सकेंगे।
नए दफ्तर से लिए गए 4 बड़े फैसले
प्रधानमंत्री ने पदभार संभालते ही किसान, महिला, युवा और गरीबों के कल्याण से जुड़ी चार बड़ी फाइलों पर मुहर लगाई:
1. PM RAHAT योजना का आगाज
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए सरकार ने PM RAHAT (राहत) योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत घायलों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज सुनिश्चित कर कीमती जान बचाना है।
2. ‘लखपति दीदी’ का लक्ष्य अब दोगुना
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया है। मार्च 2029 तक 6 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का संकल्प लिया गया है। बता दें कि 3 करोड़ का पिछला लक्ष्य समय से एक साल पहले ही पूरा कर लिया गया था।
3. कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में भारी बढ़ोतरी
किसानों की आय और भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के बजट को 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे खेती से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
4. स्टार्टअप्स के लिए ‘FoF 2.0’ को मंजूरी
तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने Startup India Fund of Funds (FoF) 2.0 को हरी झंडी दी है। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड तैयार किया गया है, जो डीप टेक और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए आइडियाज को सपोर्ट करेगा।
अब एक ही जगह होगा सारा कामकाज
इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे। अब ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ के आने से समन्वय बेहतर होगा और सरकारी कामकाज की गति में तेजी आएगी।

